Bhojpuri में पढ़ें मलिकाइन के पाती- झारखंड अब लूटखंड बन गइल बा, कलेक्टर के कमाई एतना कि नोट मसीन से गिनाइल!

पांव लागीं मलिकार ! ई का सुनाता ए मलिकार. पांड़े बाबा आज बतावत रहुवीं कि झारखंड में कवनो कलक्टर पूजा सिंघल धराइल बाड़ी. उनका घरे सरकार के कवनो ईडी महकमा छापा मरले रहल हा. घर से उनइस करोड़ से बेसी नकदी नोट पकड़ाइल बा. डेढ़ सौ करोड़ से बेसी के संपत के कागज पत्तर मिलल बा. नोट एतना बेसी रहे कि ओकरा के गिने खातिर मसीन मंगावे के पर गइल. थोरहीं दिन पहिले पांड़े बाबा बतावत रहनी कि ओइजा के मुखमंतरी, उनकर जनाना, भाई आ ओह लोगन के अमला फैला सरकारी जमीन हड़प लिहले बा लोग. एकर जांच अबे चलते रहल हा कि कलक्टर के घर से नोट पकड़इला के खबर आ गइल. पांड़े बाबा त इहो बतावत रहुवीं कि अबे त खाली उनहीं का घरे छापा परल बा, अइसनका एगारह जने अफसर के नांव झारखंड में सामने आइल बा, जे नाजायज काम कइले बा. ओहू लोग पर देर-सबेर छापा परबे करी.

सुनुवीं कि जवन कलक्टर के घरे छापा परल बा, ऊ अबले जेतना मुखमंतरी भइल बा लोग झारखंड में, ओह लोगन के खास बन जात रहली हा. इनार-पोखरा खोने वाला मनरेगा महकमा कवनो बा. ओकरा में 18 करोड़ के घोटाला भइल रहे आ ओहू में कलक्टर मैडम के नांव आइल रहे. बाकिर का जाने कवन चटकलासा उनका में बा कि सभे उनका से पटिया जाला. ओह बेरा उनका के पाक-साफ बता दिहल गइल रहे. अबे ऊ खदान महकमा के हाकिम बाड़ी. पांड़े बाबा त कहत रहुवीं कि उनहीं के किरपा से मुखमंतरी आ उनका परिवार-इयार के खदान मिलल बाटे.

इयाद पर गइली तमिलनाडु के जयललिता

हमरा इयाद परेला मलिकार, तमिलनाडु में एक बेर कवनो मुखमंतरी रहली जयललिता. बियाह-सादी ना कइले रहली. 1996 में उनका घरे छापा परल त आठ सौ किलो चानी, 28 किलो सोना, साढ़े सात सौ जोड़ा जूता-चप्पल, साढ़े दस हजार साड़ी, एकानबे गो घड़ी आ एकतालीस गो घर ठंडा करे वाला मसीन (एसी) मिलल रहे. ओह घरी आपन अम्मा जी जीयत रहनी. उहां के ई सुननी त हमरा से पूछनी कि ए बाबू बो, एतना गहनवा कें गंतिया ऊ पहिरत होई हो. ओतना में त ओकर देहिये दबा जाई. अम्मा जी के बतिया सुन के हमहूं थोरे देर खातिर भौचकिया गइल रहनी. बाद में इयाद परल कि सोना-चानी त एह घरी जमा क के राखे के फैसन चलल बा. जेकरा जरी जेतना बेसी पइसा होला, ऊ सोना-चानी कीन के राख लेला. बाकिर हमरा अचरज एह बात से भइल कि ऊ एक रुपिया महीना आपन तनखाह लेत रहली. एतना में एगो चाय ले ना मिलत होई ओहू घरी. फेर एतना संपत उनका जरी आइल कइसे. बाद में ऊ मुअली त सब धन धरतीए पर नू रह गइल. झूठे नू लोग दोसरा के सता के कमाये खातिर हाय-हाय कइले रहता मलिकार.

सुखराम के घरे भी मिलल रहे बेहिसाब नोट

राउर बतावल ओही घरी के एगो बात हमरा अबहियो इयाद बा मलिकार. कवनो एगो मंतरी रहले सुखराम. दुइए दिन पहिले ऊ चल सरग सिधार गइले. उनका घरे सीबीआई छापा मरलस त नोट के गड्डी देख के सीबीआई के सगरी अफसर लोग भौचक रह गइल रहे. कवनो सरदार जी जोगिन्दर सिंह ओह घरी सीबीआई के डायरेक्टर रहले. ऊ लोग के बतवले कि जिनिगी में ओतना नोट त ऊ कबो ना देखले रहले. पूजा घर में नोट के गड्डी लुकवा के राखल रहली सन. ओकरा बाद उनका पर केसो भइल रहे. पांड़े बाबा आज बतावत रहुवीं कि बाद में उनका अइसन बेमारी धइलस कि आखिर में दुनिया से चलिये गइले. इहे हाल नू लालू जादो के भी बा मलिकार. अब रउरे बताईं कि चारा घोटाला के पइसा खइले त कवन सुख भोग लिहले. बुढ़ौती में उनका जेल जाये के परल. जेले में बेमार अइसन परले कि अब जामिन पर घरे आइलो बाड़े त बेमारी उनकर पीछा नइखे छोड़त.

सरकारी पइसा के लूट आ घूसखोरी सगरो बा

सरकारी पइसा के लूट आ घूसखोरी के हाल सगरी जगहा एके जइसन बा मलिकार. जवन धरा जा तारे सन, ओकनी के त दोसी मान लिहल जाता, बाकिर केतने अइसन बाड़े सन, जवन अबहीं ले कमरी ओढ़ के घीव पीयत बाड़े सन. पांड़े बाबा बिहार के हाल बतावत रहुवीं. उहां के कहत रहुवीं कि 2006 से 2021 तक के पनरह साल में बिहार में चार हजार से बेसी सरकारी बाबू लोग के नांव आमदनी से बेसी संपत कमइला में आइल बा. कवनो काम बिहार में बिना घूस के नइखे होत. एही कमाई से सब आपन घर भरले बाड़े सन. अब रोजे एकनी का धरा तारे सन. सिपाही-दरोगा से लेके किरानी-हाकिम ले जवन धराले सन, ओकनी का घर से करोड़न रुपिया से कम के संपत ना पकड़ाला.

राजीव गांधी कहले रहले- सौ में 85 गायब हो जाला

हमार त मन करेला मलिकार कि अइसनका लोग के सगरी संपत जपत क लेबे के चाहीं आ चाकरी से लतिया के बाहर के रास्ता देखा देबे के चाहीं. खाली केस कइला से कुछ नइखे होखे के. केस-मोकदमा त कई साल ले चलत रह जाला. सरकारी पइसा के त ई बानर लेखां बांट ले तारे सन. पांड़े बतावत रहुवीं कि सोनिया गांधी के मरद राजीव गांधी जब परधान मंतरी रहले त एक बेर कहले रहले कि ऊपर से सरकार एक रुपया जनता खातिर भेजे ले त ओइमें पचासी पइसा राहे में गायब हो जाला. एकनिये अइसन अफसर नू लूट लेले सन मलिकार. बिहार में त अब मुखिया लोग भी सरकार से तनखाह लेता. ओहू लोग के गड़बड़ी धराइल बा, बाकिर अबे ले खाली दू गो के सजाय भइल बा. पनरह साल में 213 मुखिया पर पइसा के गड़बड़ी के केस भइल, बाकिर दू आदमी के सजाय से का होखे के बा. सजाय होखे में देरी से कानून के एकबाल ओराइल जाता मलिकार.

कटनी-दंवरी हो गइल, आलू के त भावे नइखे

डीह बाबा के असीरवाद से हमनी नीक-निरोग बानी सन. काली माई से गोहराइले कि रउरो ठीक रहीं. कटनी-दंवरी संपर गइल मलिकार. आलू कोड़ा के घरे आ गइल बा. असों आलू में घाटा हो गइल मलिकार. चौदह रुपिया किलो बीया कीन के रोपववले रहनी ललका आलू. बैपारी छह रुपिया किलो से बेसी दामे नइकन सन लगावत. अब खेतीबारी घाटा के सउदा हो गइल बा मलिकार. एक त जाना-मजूरा नइखन मिलत. तनी रेट बढ़ा के काम त निकल जाता, बाकिर लागत आ आमद में फरक देख के अब खेती करवावे के मन नइखे करत. आपन खेयाल राखेब.

राउर, मलिकाइन

(ओमप्रकाश अश्क स्वतंत्र पत्रकार हैं. आलेख में व्यक्त विचार उनके निजी हैं.)

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