Adhik Mas 2020: पुरुषोत्तम मास में अबकी बार 15 दिन शुभ योग, हर किसी पर बरसेगी हरिकृपा

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Adhik Mas 2020: पुरुषोत्तम मास में अबकी बार 15 दिन शुभ योग, हर किसी पर बरसेगी हरिकृपा

पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृ विसर्जन बृहस्पतिवार को होगा। इसी के साथ 18 सितंबर से भगवान विष्णु की आराधना का पुरुषोत्तम मास आरंभ हो जाएगा। इस बार पुरुषोत्तम मास में 15 शुभ योग रहेंगे। शुक्रवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल योग में शुरू हो रहे पुरुषोत्तम मास के आखिरी दिन 17 अक्तूबर तक शुभ योग बन रहे हैं। इस दौरान नौ सर्वार्थसिद्धि योग,दो द्विपुष्कर योग, एक अमृतसिद्धि योग और दो दिन पुष्य नक्षत्र के योग मिलेंगे। रविवार और सोमवार को पुष्य नक्षत्र अधिक फलदायी होगा।

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पितृपक्ष के विसर्जन के दूसरे दिन पुरुषोत्तम मास लगते ही महीने भर के लिए व्रत,पूजा-पाठ, ध्यान, जप, भजन- कीर्तन और दीपदान आरंभ हो जाएगा। सनातनधर्मी त्रिवेणी संगम के अलावा गंगा-यमुना के तटों पर भगवान श्रीहरि की महीने भर आराधना करेंगे। इस दौरान यज्ञ, हवन के अलावा श्रीमद्भागवत, भागवत पुराण, विष्णु पुराण, शिवपुराण का पाठ होगा।

पौराणिक मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे महीने में भगवान श्रीहरि की आराधना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस बार पुरुषोत्तम मास हर किसी के लिए खास होगा। इस मास में नौ सर्वार्थ सिद्धि योग मिल रहा है। शुक्रवार को शुरुआत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल नाम के शुभ योग में होगी।

यानी इस मास का पहला दिन दिन बेहद शुभदायी रहेगा। यह योग मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला और हर काम में सफलता देने वाला होता है। 26 सितंबर के बाद एक अक्तूबर, चार अक्तूबर, छह-सात अक्तूबर, नौ अक्तूबर, 11 अक्तूबर और  17 अक्तूबर को यह योग रहेगा। इसी तरह इस महीने में दो दिन द्विपुष्कर योग मिलेगा। ज्योतिष के अनुसार इस योग में किए गए किसी भी काम का दोगुना फल मिलता है। 19 और 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग रहेगा। इसी तरह दो अक्तूबर को अमृतसिद्धि योग है।

पुरुषोत्तम मास में अमृत सिद्धि योग भी
पुरुषोत्तम मास में एक दिन अमृतसिद्धि योग भी रहेगा। इस मास में दो अक्तूबर अमृत सिद्धि योग है। मान्यता के अनुसार इस योग में किया गया कोई भी कार्य दीर्घ फलदायी होता है।

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पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पितृ विसर्जन बृहस्पतिवार को होगा। इसी के साथ 18 सितंबर से भगवान विष्णु की आराधना का पुरुषोत्तम मास आरंभ हो जाएगा। इस बार पुरुषोत्तम मास में 15 शुभ योग रहेंगे। शुक्रवार को उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल योग में शुरू हो रहे पुरुषोत्तम मास के आखिरी दिन 17 अक्तूबर तक शुभ योग बन रहे हैं। इस दौरान नौ सर्वार्थसिद्धि योग,दो द्विपुष्कर योग, एक अमृतसिद्धि योग और दो दिन पुष्य नक्षत्र के योग मिलेंगे। रविवार और सोमवार को पुष्य नक्षत्र अधिक फलदायी होगा।

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पितृपक्ष के विसर्जन के दूसरे दिन पुरुषोत्तम मास लगते ही महीने भर के लिए व्रत,पूजा-पाठ, ध्यान, जप, भजन- कीर्तन और दीपदान आरंभ हो जाएगा। सनातनधर्मी त्रिवेणी संगम के अलावा गंगा-यमुना के तटों पर भगवान श्रीहरि की महीने भर आराधना करेंगे। इस दौरान यज्ञ, हवन के अलावा श्रीमद्भागवत, भागवत पुराण, विष्णु पुराण, शिवपुराण का पाठ होगा।

पौराणिक मान्यता के अनुसार पुरुषोत्तम मास के अधिष्ठाता भगवान विष्णु हैं, इसीलिए इस पूरे महीने में भगवान श्रीहरि की आराधना की जाएगी। ज्योतिषाचार्य ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस बार पुरुषोत्तम मास हर किसी के लिए खास होगा। इस मास में नौ सर्वार्थ सिद्धि योग मिल रहा है। शुक्रवार को शुरुआत उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और शुक्ल नाम के शुभ योग में होगी।

यानी इस मास का पहला दिन दिन बेहद शुभदायी रहेगा। यह योग मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला और हर काम में सफलता देने वाला होता है। 26 सितंबर के बाद एक अक्तूबर, चार अक्तूबर, छह-सात अक्तूबर, नौ अक्तूबर, 11 अक्तूबर और  17 अक्तूबर को यह योग रहेगा। इसी तरह इस महीने में दो दिन द्विपुष्कर योग मिलेगा। ज्योतिष के अनुसार इस योग में किए गए किसी भी काम का दोगुना फल मिलता है। 19 और 27 सितंबर को द्विपुष्कर योग रहेगा। इसी तरह दो अक्तूबर को अमृतसिद्धि योग है।

पुरुषोत्तम मास में अमृत सिद्धि योग भी
पुरुषोत्तम मास में एक दिन अमृतसिद्धि योग भी रहेगा। इस मास में दो अक्तूबर अमृत सिद्धि योग है। मान्यता के अनुसार इस योग में किया गया कोई भी कार्य दीर्घ फलदायी होता है।

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